:
Breaking News

पटना: सीएम चेहरे पर सियासी घमासान, ललन सिंह के नाम से NDA में नई बहस छेड़ने की कोशिश

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

आईपी गुप्ता के बयान से ‘अगड़ा-पिछड़ा’ राजनीति को हवा, BJP-JDU ने कहा—निर्णय गठबंधन और नीतीश कुमार के नेतृत्व में होगा

पटना: बिहार की राजनीति में एक बार फिर मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्षी खेमे की ओर से दिए गए एक बयान ने सत्तारूढ़ गठबंधन NDA के भीतर नई बहस को जन्म दे दिया है। राज्य की राजनीति में जातीय समीकरणों को केंद्र में रखते हुए विपक्ष ने ऐसा दांव चला है, जिससे सियासी माहौल गर्म हो गया है।

दरअसल, एक विधायक द्वारा केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह को बिहार का अगला मुख्यमंत्री बनाने की बात कही गई है। इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। इसे महज एक सुझाव नहीं, बल्कि एक रणनीतिक चाल के तौर पर देखा जा रहा है, जिसका मकसद NDA के भीतर सामाजिक समीकरणों को लेकर असहज स्थिति पैदा करना है।

इस बयान के पीछे की राजनीति को समझना जरूरी है। बिहार की सियासत में लंबे समय से अगड़ा और पिछड़ा वर्ग के बीच संतुलन एक अहम मुद्दा रहा है। ऐसे में जब किसी सवर्ण चेहरे को मुख्यमंत्री बनाने की बात सामने आती है, तो यह स्वाभाविक रूप से राजनीतिक बहस का विषय बन जाता है।

विधायक आईपी गुप्ता ने अपने बयान में यह तर्क दिया कि बिहार को अब तक समाजवादी विचारधारा के नेताओं ने आगे बढ़ाया है। उन्होंने जय प्रकाश नारायण, कर्पूरी ठाकुर और नीतीश कुमार जैसे नेताओं का जिक्र करते हुए कहा कि वर्तमान समय में भी ऐसे नेता मौजूद हैं, जो इसी परंपरा को आगे बढ़ा सकते हैं। इसी क्रम में उन्होंने ललन सिंह का नाम आगे किया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान सीधे तौर पर NDA के भीतर सामाजिक समीकरणों को लेकर बहस छेड़ने की कोशिश है। खासकर तब, जब यह चर्चा पहले से चल रही है कि भविष्य में मुख्यमंत्री पद भाजपा के हिस्से में जा सकता है। ऐसे में किसी खास जाति के नेता का नाम उछालना एक सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है।

NDA के भीतर भी संभावित मुख्यमंत्री चेहरों को लेकर समय-समय पर चर्चाएं होती रही हैं। विभिन्न नेताओं के नाम सामने आते रहे हैं, जिनमें अलग-अलग सामाजिक वर्गों का प्रतिनिधित्व दिखता है। यही वजह है कि विपक्ष इस मुद्दे को उछालकर गठबंधन के अंदर मतभेद पैदा करने की कोशिश कर रहा है।

हालांकि, भाजपा ने इस बयान को ज्यादा तवज्जो नहीं दी है। पार्टी के प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने स्पष्ट कहा कि मुख्यमंत्री पद को लेकर फैसला NDA का आंतरिक मामला है और विपक्ष को इसमें दखल देने की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं और वही नेतृत्व कर रहे हैं।

प्रेम रंजन पटेल ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में मुख्यमंत्री कौन होगा, यह निर्णय उचित समय पर लिया जाएगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह फैसला गठबंधन के शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर होगा और इसमें सभी घटक दलों की सहमति जरूरी होगी।

वहीं, जनता दल (यूनाइटेड) की ओर से भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया सामने आई है। पार्टी के प्रवक्ता महेश दास ने कहा कि मुख्यमंत्री का चयन NDA के अधिकार क्षेत्र में आता है और इसमें किसी बाहरी बयान का कोई महत्व नहीं है। उन्होंने साफ किया कि इस मामले में नीतीश कुमार का मार्गदर्शन सर्वोपरि रहेगा।

जदयू की ओर से यह भी कहा गया कि गठबंधन में कई ऐसे नेता हैं, जिनमें नेतृत्व क्षमता है, लेकिन अंतिम निर्णय सामूहिक रूप से लिया जाएगा। साथ ही यह भी संकेत दिया गया कि मुख्यमंत्री वही बनेगा, जो गठबंधन की नीतियों और विकास के एजेंडे को आगे बढ़ा सके।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह भी चर्चा तेज हो गई है कि हाल के दिनों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबरों के बाद बिहार में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अटकलें बढ़ी हैं। हालांकि, आधिकारिक तौर पर अभी तक कोई स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि विपक्ष इस समय हर उस मुद्दे को उठाने की कोशिश कर रहा है, जिससे सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर असहजता पैदा हो। मुख्यमंत्री पद को लेकर बयान देना उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा से अहम भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में किसी भी नेता का नाम उछालना केवल व्यक्तिगत समर्थन नहीं, बल्कि एक बड़े सामाजिक संदेश का हिस्सा होता है। यही कारण है कि इस बयान को गंभीरता से लिया जा रहा है, भले ही सत्तारूढ़ दल इसे हल्के में लेने की कोशिश कर रहे हों।

फिलहाल स्थिति यह है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और सभी दल अपने-अपने स्तर पर बयानबाजी कर रहे हैं। लेकिन इतना तय है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक गर्मा सकता है और बिहार की राजनीति में नई दिशा तय कर सकता है।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *